In कहानी-संग्रह, बुरी लड़की

संवेदनाओं की आवाज़- बुरी लड़की

In फ़िल्में, समीक्षा

चलो...कुछ तमाशा हो जाए...

In बस यूँ ही...चलते-चलते..., बेतरतीब पन्ने

कुछ ख़्वाब...कुछ ख्वाहिशें...(निवेदिता-अमित) मेरी नज़र में...

In बस यूँ ही...चलते-चलते..., बेतरतीब पन्ने

मैं घर लौटा- (श्री रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’)...मेरी नज़र में